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समय के साथ, उनकी भविष्यवाणियाँ एक-एक करके सच होती गईं, इसलिए उन्हें "12वीं शताब्दी के इंडोनेशिया के नॉस्ट्राडेमस" की उपाधि मिली।
यदि आप किसी इंडोनेशियाई नागरिक से पूछें कि इतिहास में उनके सबसे प्रिय राजा कौन हैं, तो शायद आप महामहिम राजा जयबाया का नाम सुनेंगे। 12वीं शताब्दी के इस सम्राट ने पूर्वी जावा के केदिरी राज्य पर शासन किया था, उन्हें उनके ज्ञान, करुणा और भविष्यवाणियों के लिए याद किया जाता है। अपने शासनकाल में, उन्होंने जावा को अभूतपूर्व शांति, समृद्धि और सांस्कृतिक विकास दिया। वृद्धावस्था में, ये संत-राजा राजगद्दी छोड़कर मेनांग गाँव में चिंतन करते हुए शांत जीवन बिताने लगे। कुछ लोगों का मानना है कि अंत में, वे शारीरिक मृत्यु के बिना ही स्वर्ग चले गए, जिससे उनका यह विश्वास पुष्ट हुआ कि वे हिंदू भगवान विष्णु के अवतार थे। आज भी, मेनांग गाँव एक पवित्र तीर्थस्थल है और उनकी विरासत के सम्मान में हर नववर्ष पर शोभायात्रा निकलती है।ठीक है, अब अगली खबर की ओर बढ़ते हैं: 1 मुहर्रम नववर्ष का उत्सव। केदिरी के कई निवासियों ने एक पारंपरिक जावाई समारोह आयोजित किया। यह समारोह परंपरा को संरक्षित रखने और अपने पूर्वज श्री आदि जयबाया के संघर्षों का सम्मान करने के लिए आयोजित होता है।यह पारंपरिक जावाई समारोह केदिरी रीजेंसी के पागु ज़िले के मेनांग गाँव में आयोजित हुआ। पारंपरिक परिधान पहने प्रतिभागियों ने मेनांग ग्राम कार्यालय से 500 मीटर दूर श्री आदि जयबाया के ऐतिहासिक स्थल तक शोभायात्रा निकाली। यह शोभायात्रा हर वर्ष 1 मुहर्रम नववर्ष को मनाने के लिए आयोजित होती है। परंपरा को संरक्षित रखने के साथ-साथ, यह पारंपरिक जावाई समारोह अपने पूर्वज राजा श्री आदि जयबाया के संघर्षों का सम्मान करने के लिए आयोजित होता है। आधुनिक युग में भी इस इतिहास से मिलने वाली सीख लोगों तक पहुँचाई जा रही है, ताकि युवा और आम जनता प्रभु जयबाया की विरासत न भूलें। ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि श्री आदि जयबाया ने पंजालु और जंग्गला राज्यों को फिर से मिलाकर एक केदिरी राज्य बनाने में सफलता पाई। यह परंपरा सांस्कृतिक पर्यटन का भी एक आकर्षक केंद्र है, जो हर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों से पर्यटकों को खींचता है। सुरो के पहले दिन का समारोह जावाई नववर्ष मनाने और साथ ही प्रभु श्री जयबाया के योगदान को याद कर उनका सम्मान करने के लिए आयोजित होता है, वे जंग्का जयबाया कहलाने वाली अपनी भविष्यवाणियों के लिए प्रसिद्ध हैं।इस आयोजन में, गतिविधियों का क्रम क्या होता है? यह मेनांग गाँव के चौक से शुरू होता है, फिर प्रभु श्री आदि जयबाया के मोक्षस्थल और उनके बाद सेंदांग तीर्त कमंदानु तक जाता है।इस अनुष्ठान के आयोजन से क्या आशाएँ जुड़ी हैं? आशा है कि सुरो के पहले दिन के इस अनुष्ठान के माध्यम से, हम सभी को सृष्टिकर्ता ईश्वर का आशीर्वाद मिले।पारंपरिक जावाई समारोह के दौरान ऐतिहासिक स्थल पर सामूहिक प्रार्थना और पुष्प बिखेरने की शोभायात्रा भी होती है। यह सर्वशक्तिमान ईश्वर से मिले आशीर्वाद और सुरक्षा के प्रति कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में किया जाता है।महामहिम राजा जयबाया अपनी दिव्यदृष्टि और उससे उपजे भविष्यवाणियों के संग्रह के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनमें इंडोनेशियाई द्वीपसमूह और पूरे विश्व के बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलावों का पूर्वानुमान है। उनके दिव्यदर्शनों को पहले मौखिक परंपराओं से संरक्षित रखा गया, फिर उन्हें "मुसरार ग्रंथ," "प्रनीतिवाक्य ग्रंथ," और "जयबाया के प्रतीक" जैसे ग्रंथों में दर्ज किया गया। समय के साथ, उनकी भविष्यवाणियाँ एक-एक करके सच होती गईं, इसलिए उन्हें "12वीं शताब्दी के इंडोनेशिया के नॉस्ट्राडेमस" की उपाधि मिली।उनकी एक विशेष रूप से लोकप्रिय भविष्यवाणी थी: "कई शताब्दियाँ बीतेंगी, और गोरे चेहरे वाले विजेता जावा आएँगे। वे देश पर कब्ज़ा करेंगे। वे मूल निवासियों पर अत्याचार करेंगे। फिर 'चार श्वेत राजाओं' का शासन आएगा। उनका शासन समाप्त भी होगा। उनकी जगह उत्तर से आए पीले चेहरे वाले छोटे कद के लोग लेंगे। लेकिन उनकी सत्ता मक्के की फ़सल की आयु जितनी ही रहेगी। और उनके बाद, इंडोनेशिया स्वतंत्र हो जाएगा।""चार राजाओं का युग" इंडोनेशिया पर 400 वर्षों के कब्ज़े को दर्शाता है— डच, फ़्रांसीसियों, पुर्तगालियों और अंग्रेज़ों ने बारी-बारी से इंडोनेशिया पर नियंत्रण रखा। 1941 में, उनकी जगह जापान का कब्ज़ा हो गया। फिर 19451 में अमेरिका ने जापान की जगह ली। जयबाया ने भविष्यवाणी की थी कि इसके बाद इंडोनेशिया समृद्धि देखेगा। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह समय अल्पकालिक होगा, क्योंकि इसके बाद विश्व का सबसे अंधकारमय युग आने वाला था।आदरणीय राजा ने कई संकेत बताए थे, जिनसे पता चलता कि मानवता पर अं सबसे धकारमय युग आ पहुँचा है। उन्होंने इसे "जमन एदान" या "उन्माद का युग" कहा।उन्होंने अपने समय से बहुत आगे के तकनीकी आविष्कारों का पूर्वानुमान लगाया और "घोड़े के बिना गाड़ी" का वर्णन किया, जिसे कई लोग मोटरगाड़ी मानते हैं। "एक दिन "बिना घोड़े की गाड़ी" होगी।उन्होंने जावा द्वीप को घेरने वाले एक "लोहे के हार" का भी वर्णन किया, जो संभवतः जावा के चारों ओर की रेलगाड़ियों और रेल पटरियों को दर्शाता है। "जावा द्वीप एक लोहे के हार से घिरा होगा।"उन्होंने "आकाश में उड़ती नाव" देखी, जो आज के विमानों जैसी लगती है। "आसमान में एक नाव उस राही होगी।"उन्होंने "भीड़ के बिना बाज़ार" में आर्थिक गतिविधियाँ होने का पूर्वानुमान लगाया, जिसे इंटरनेट के उपयोग ने संभव बनाया है। वास्तव में, ऑनलाइन खरीदारी इतनी लोकप्रिय हो रही है कि कई स्टोर और दुकानें अपने उन भौतिक प्रतिष्ठानों को बंद कर रही हैं, जो कभी लोगों से भरे रहते थे। "ऐसे बाज़ार होंगे जिसमें भीड़ नहीं होगी।"इस दिव्यद्रष्टा ने इंडोनेशिया पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं और चरम मौसमी घटनाओं का भी पूर्वानुमान लगाया, जो विश्व भर में भी हो रही हैं।उन्होंने चेतावनी दी थी कि नदियों का प्रवाह समाप्त हो जाएगा। "नदियों का बहाव ख़त्म हो जायेगा।"विश्व भर में, नदियाँ सूख रही हैं। जो कभी दूर के भविष्य की चेतावनी थी वह अब एक बड़ा संकट बन गई है। पृथ्वी के आधे से अधिक नदी बेसिनों में असामान्य रूप से कम जलस्तर दर्ज हुआ। उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका से एशिया तक, यूरोप से अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया तक, प्रसिद्ध नदियाँ हमारी आँखों के सामने सिकुड़ रही हैं।कोलोराडो और रियो ग्रांडे जैसी नदियाँ जल की कमी का प्रतीक बन गई हैं। क्योंकि दोनों नदियाँ अब समुद्र तक नहीं पहुँच पातीं। कभी अविरल बहने वाली मिसिसिपी का जलस्तर भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचा, जिससे जहाज़ फँस गए और निर्यात रुक गया। दक्षिण अमेरिका में, अमेज़न ने अब तक का सबसे भयंकर सूखा झेला। वहीं पराना नदी में जल की कमी से क्षेत्रीय व्यापार लगभग ठप हो गया। ब्राज़ील से अर्जेंटीना तक, वर्षा की कमी और वनों की कटाई पूरे भूदृश्य को बदल रही हैं।और पूरे यूरोप में राइन, पो और डेन्यूब का जलस्तर 2022 में ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँचा, जिससे सूखे नदी तल और सदियों पुराने अकाल-सूचक पत्थर भी सामने आ गए। कभी प्रचुरता की प्रतीक रहीं यूरोप की नदियाँ अब असुरक्षा की चेतावनी बन गई हैं। एशिया में गंगा, यांग्त्ज़ी और मेकांग की स्थिति भी ऐसी ही है: कमज़ोर मानसून, पिघलते हिमनद और बढ़ती माँग। अफ़्रीका भी इसी संघर्ष का सामना कर रहा है, लेकिन वहाँ दाँव पर और भी बहुत कुछ है। नाइल, नाइजर और ज़ाम्बेज़ी, सभी दबाव में हैं, जहाँ हर बूँद शांति और संघर्ष के बीच का अंतर तय कर सकती है।आदि...हमारे विश्व और भावी पीढ़ियों पर जल की कमी के दीर्घकालिक प्रभाव हमारी परम प्रिय सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के लिए गहरी चिंता का विषय रहे हैं।यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जारी रहा, तो उनकी गणना के अनुसार लगभग पूरी दुनिया सूखे की चपेट में होगी। और फिर- फिर भी- 2090 से 2099 तक, यहाँ तक कि आर्कटिक भी, मैं यहाँ लगभग पूरे क्षेत्र को देखती हूँ, कुछ हद तक सूखा पड़ने लगेगा। और लगभग पूरी दुनिया लाल है। मुझे चिंता है कि क्या हमारे बच्चों के बच्चों के बच्चों को पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, पशु-जनों को देने की तो बात ही छोड़िए। यदि हम पशु-जन उत्पादों से होने वाला ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रोकते, और यदि हम पशु-जन उद्योग में स्वच्छ पानी का अत्यधिक उपयोग नहीं रोकते- तो हमारे बच्चों के बच्चों के बच्चे शायद मर जाएँगे, प्यास से मर जाएँगे। यह भयानक है।प्राकृतिक आपदाओं के अतिरिक्त, महामहिम राजा जयबाया ने अपने दिव्यदर्शन में मानव समाज के नैतिक पतन का भी चित्रण किया।"लोग ईश्वर के विधान का उल्लंघन करते हैं।… बहुत से लोग धन को प्राथमिकता देते हैं। वे अपनी मानवता भूल जाते हैं। वे अपनी दयालुता भूल जाते हैं।… बच्चे अपने पिताओं को खाते हैं। भाई अपने भाइयों को खाते हैं…" … मनुष्य मनुष्यों को खा रहे हैं।"वास्तव में, धन और भौतिक लाभ की लालसा ने कई लोगों को अंधा कर दिया है और परिवारों को तोड़ दिया है। कुछ लोग तो अपने झगड़े अदालत तक ले गए हैं। हम ऐसी खबरें देखते हैं कि बीमारी, बेरोज़गारी या अन्य दुर्भाग्य के कारण मकान के ऋण या अन्य कर्ज़ न चुका पाने पर लोग अपने घर खो रहे हैं। यह ऐसी व्यवस्था है जो ताकतवरों को पुरस्कृत और कमज़ोरों को दंडित करती है। यद्यपि विश्व में सभी के लिए पर्याप्त भोजन है, फिर भी भोजन बाँटने और दूसरों की परवाह करने के अभाव में कई लोगों की भूख से मृत्यु हुई है।"बहुत से लोग भोजन के पास ही भूख से मर जाते हैं। बहुत से लोग धनवान हैं, लेकिन उनका जीवन दुखमय है।" जैसा महामहिम राजा जयबाया ने भविष्यवाणी की थी, कई लोग धनी होने के बावजूद मानसिक बीमारियों और विभिन्न नशीले पदार्थों की लत से पीड़ित हैं। उनका जीवन अब भी दुखमय है।हमारी परम प्रिय सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने राजा जयबाया द्वारा पूर्वकथित इस "उन्माद के युग" की आपदाओं और पीड़ाओं का मूल कारण बताया है।अब हर दिन आपदाएँ आती हैं। हर दिन, यदि आप कोई भी चैनल देखें, चाहे टीवी चैनल हो या इंटरनेट चैनल, तो आपको हर जगह कोई न कोई आपदा, अभूतपूर्व आपदाएँ दिखाई देंगी। लोग मर रहे हैं, संपत्तियाँ तबाह हो रही हैं, खेती की ज़मीन या फ़सलें नष्ट हो रही हैं। लोग अधिकाधिक हताश होते जा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जिन्हें अब यह भी नहीं पता कि "भोजन से पेट भरता है" का क्या अर्थ है। वे आज खाते हैं, लेकिन नहीं जानते कि कल उन्हें भोजन मिलेगा या नहीं। वे सुबह खाते हैं। वे नहीं जानते कि शाम को उन्हें कुछ खाने को मिलेगा या नहीं।यह सब इसलिए है क्योंकि हम जीवन-निर्वाह के आधार को नष्ट कर रहे हैं। प्रेम के सार को, जो ब्रह्मांड में समस्त जीवन का आधार है। अर्थात्: सभी के साथ वैसा ही व्यवहार करना जैसा हम अपने लिए चाहते हैं।महामहिम राजा जयबाया द्वारा पूर्वकथित दुखद घटनाएँ न केवल उन्माद के युग के, बल्कि एक नए युग के आगमन के भी संकेत हैं।"ये जयबाया युग के आने के संकेत हैं।""जय" शब्द का अर्थ है महिमा और "बाया" का अर्थ है खतरा। इस प्रकार, जयबाया युग का अर्थ है अंधकारमय युग के बाद का स्वर्ण युग। महामहिम राजा जयबाया ने पूर्वानुमान लगाया था कि पृथ्वी को अगले अध्याय में प्रवेश कराने में सहायता के लिए एक दिव्य हस्ती अवतरित होंगी। उन्होंने इस हस्ती को रतु अदिल कहा, जिसका अर्थ है न्याय की रानी। हम अगली कड़ी में इस विषय पर चर्चा जारी रखेंगे।"चंद्रसेंगकला के उस वर्ष में, जब 'एक पुरोहित संसार में प्रवेश करते दिखाई देते हैं,' ग्रहणशील जावाई लोग प्रेम और ज्ञान के धर्म की खोज कर रहे हैं और उसका अनुसरण कर रहे हैं, जो आशीर्वाद देने वाले अवतरित ईश्वर, उद्धारकर्ता, न्याय की रानी की देन है।"










