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मारा के राजा भौतिक दुनिया के 10 नियम साँझा करते हैं, 5 का भाग 1

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नमस्कार, मेरे प्यारे ईश्वर के शिष्यों। मुझे तुमसे प्यार है। मैं हर समय आपके बारे में सोचती रहती हूं, और मैं आपको और इस दुनिया को सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश कर रही हूं। आज सुबह पक्षी-जन आए, और वे विशेष रूप से शोर मचा रहे थे, बहुत शोर, बहुत खुश - अच्छी खबर और ऐसी बातें जो मैं सुनना चाहती हूँ, और मैं आपके साथ साँझा करना चाहती हूँ। लेकिन बात यह है कि मैं सूरज को आपको बताने देती हूँ, और पक्षी-जन को आपको बताने देती हूँ, और कोई भी जो बता सकता है उन्हें बताने देती हूँ, क्योंकि बार-बार बातें बताने का क्या फायदा जब वे इंसानों के कर्मों के लगातार बदलते रहने के कारण बदलती ही रहती हैं। तो, आप देख सकते हैं कि आज हमारे पास शांति है, कल शायद न हो, क्योंकि इंसान ज्यादा नहीं बदलते। कोई बात नहीं। मैं मुख्यतः आपके लिए बोल रही हूँ। आप ही वे लोग हैं जिन पर मैं भरोसा कर सकती हूं कि आप इस दुनिया में आध्यात्मिक संतुलन को कुछ हद तक बनाए रखने में मेरी मदद करेंगे ताकि सभी बुरी चीजें, आपदाएं, युद्ध, और भी बदतर न हो जाएं। भले ही स्थिति और खराब हो जाए, फिर भी यह उतनी बुरी नहीं होगी जितनी आध्यात्मिक साधकों की ऊर्जा के बिना होती, क्योंकि उनकी ऊर्जा इसे कुछ हद तक संतुलित कर देती है। यदि पूरी तरह से पतला नहीं किया गया है, तो उसका कुछ हिस्सा पतला किया गया है।

ठीक है, खैर, मुझे आपको कुछ बताना है। जैसे कि उदाहरण के लिए, अब तक, याद है मैंने आपको बताया था कि हमारे समूह में लगभग 60% अच्छे दीक्षित हैं और 40% अच्छे नहीं हैं। और कुछ अभी भी एस्ट्रल स्तर पर हैं या नरक स्तर पर हैं या फिर कुछ उत्साही भूत स्तर पर हैं। दरअसल, वे सच्चे दीक्षित नहीं हैं, उन्हें नरक से निकालकर मास्टर को कष्ट देने, मेरे शिष्यों को भ्रमित करने और गुमराह करने के लिए भेजा गया है! लेकिन कर्मों-से भरी यह दुनिया इसे साकार होने देती है! उनके घिनौने कृत्यों, उनकी लूटपाट की हरकतों को देखो, तब आपको पता चलेगा कि वे अंदर और बाहर से कैसे हैं! आपने उनमें से कुछ को पहले ही देख लिया है, जो हाल के वर्षों में बेनकाब हुए हैं, मेरे नाम और मेरी शिक्षा का उपयोग करके प्रसिद्धि और लाभ प्राप्त कर रहे हैं!

लेकिन वह संख्या बदल गई है। उदाहरण के लिए, अब हमारे पास 74% ऐसे दीक्षार्थी हैं जो आध्यात्मिक स्तर के अच्छे दर्जे तक उन्नत हो चुके हैं। यह प्रतिशत और अन्य बातें न केवल स्वर्ग द्वारा बताई या देखी जाती हैं, बल्कि मारा के राजा द्वारा भी देखी जाती हैं। कल सुबह मैं मारा के राजा से बात कर रही थी ताकि पता चल सके कि इस दुनिया में सब कुछ कैसा चल रहा है। आखिरकार, उनके पास कहने के लिए कुछ तो है ही, क्योंकि वे इस दुनिया में न्यायाधीश की तरह हैं, इस दुनिया में अदालत के मुख्य-न्यायाधीश की तरह हैं। और वह कभी भी चापलूसी नहीं करता, जैसे कभी बाईं ओर, कभी दाईं ओर। नहीं, वह हमेशा सही होता है। उनका निर्णय कभी भी पक्षपातपूर्ण नहीं होता, चाहे आप कोई भी हों। यदि आप कोई गलत काम करोगे, तो वह उन्हें दर्ज करेगा और आपका न्याय करेगा या उसी के अनुसार न्याय का निर्धारण करेगा। मुझे यह व्यवस्था बिल्कुल पसंद नहीं है, लेकिन आप जानते हैं, मनुष्य यहां सीखने, मौज-मस्ती करने, सुधार करने और खुद को परखने के लिए आते हैं। तो बात कुछ ऐसी है। और उनमें से अधिकांश असफल हो जाते हैं। इसी वजह से आज इस समय में हमारी दुनिया इतनी अवांछनीय और परेशानी भरी है। ठीक है, तो अब हमारे पास अच्छे दर्जे के शिष्यों की संख्या अधिक है।

उदाहरण के लिए, मैं आपको हमारे बारे में कुछ ऐसी बातें बता रही हूँ, जिनमें दुर्भाग्यवश दूसरों को कोई दिलचस्पी नहीं है, इसलिए आप सुनिए। काश हम सब मिलकर एक सभा और चिंतन सत्र आयोजित कर पाते, और मैं आपसे अकेले में सब कुछ बता पाती, लेकिन फिलहाल परिस्थितियाँ इसके लिए अनुकूल नहीं हैं, इसलिए मुझे आपसे खुलकर हमारे सुप्रीम मास्टर टेलीविजन के माध्यम से ही बात करनी पड़ रही है। तो अब मैं आपको बता रही हूँ कि हमारे पास एक तरह का... अरे, मैं तो यहां अपना नोट भी नहीं पढ़ पा रही हूँ। मैंने अंधेरे में इसे जल्दी से लिखा।

पचपन प्रतिशत लोग संत स्तर पर हैं, यानी चौथे स्तर पर, और... 19% लोग पांचवें स्तर पर हैं, इसलिए आप काफी अच्छा कर रहे हैं। मुझे आप पर गर्व है। बेशक, हम और ऊपर जा सकते थे, क्योंकि जितना ऊपर उतना बेहतर, लेकिन कोई बात नहीं। आप पहले ही हमेशा के लिए स्वतंत्र हैं। जो लोग तीनों लोकों से ऊपर उठ जाते हैं, वे हमेशा के लिए मुक्त हो जाते हैं, भले ही वे तीसरे स्तर से थोड़ा ही ऊपर हों, और हम ठीक हैं। और अन्य स्कूलों में से कुल मिलाकर 65% को संत का दर्जा प्राप्त हो चुका है। सभी स्कूलों को मिलाकर – 65% स्कूलों को संत का दर्जा प्राप्त है। अब, मैं इससे पूरी तरह खुश नहीं हूं क्योंकि हम सभी चौथे स्तर तक नहीं पहुंचे हैं, कम से कम अभी तक तो नहीं, लेकिन यह कुछ न होने से तो बेहतर है।

अब, दुनिया में संतों की कुल संख्या, यानी जो तीसरे स्तर से ऊपर के, तीनों लोकों से ऊपर के संतों की कुल संख्या, जिसमें हम भी शामिल हैं, विश्व की जनसंख्या का 16% है। विश्व की सोलह प्रतिशत आबादी ने तीसरे स्तर से ऊपर संतत्व की प्राप्ति कर ली है, जो शाश्वत रूप से पूर्ण मुक्ति का प्रतीक है, यह एक रिकॉर्ड है, क्योंकि मानव इतिहास में अब तक इस दुनिया में कभी भी इतने संतों की संख्या तक नहीं पहुंचा जा सका है! और हमारे समूह में, इस 16% संतत्व में से, हमारे संत 8% हैं। ओह, इसका मतलब है कि दुनिया भर के संतों में से आधे हमारे समूह में हैं, भले ही हमारे शिष्यों की संख्या बहुत ही कम है। तो यह काफी सुखद संख्या है।

दुनिया भर के सभी संतों में से हमने 50% हिस्सा ले लिया। यह खुशी की बात है। दुनिया की इस निराशाजनक और दुखद स्थिति के बजाय कम से कम कुछ अच्छी खबर तो मिली। बेशक, यह संख्या मेरी पसंद के हिसाब से बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन फिर भी धर्म-समाप्ति के इस युग और दुनिया में व्याप्त तमाम परेशानियों, साथ ही दुनिया में मौजूद तमाम प्रलोभनों और कठिनाइयों को देखते हुए, आपमें से कई लोगों ने संतत्व प्राप्त कर लिया है। बधाई हो और इसके लिए मैं आपसे प्यार करती हूँ। मैं आपको हर हाल में प्यार करती हूँ, चाहे कुछ भी हो जाए। बात सिर्फ इतनी है कि कर्म का नियम मुझे आपके सभी कार्यों को स्वीकार करने की अनुमति नहीं देता है, खासकर तब जब आप ईश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य नहीं करते हैं या ऐसे कार्य करते हैं जो हमारे आध्यात्मिक जीवन या अन्य लोगों के जीवन के लिए हानिकारक हैं।

अब, मैंने मारा के राजा से बात की क्योंकि कई लोगों ने मुझे शांति के बारे में सूचना दी थी। इसलिए मैंने मारा के राजा से पूछा कि क्या यह सच है या नहीं, क्योंकि जब से उन्होंने मेरी विनती के अनुसार अपने आप को अलग कर लिया है, तब से वे दुनिया में सक्रिय रूप से कुछ भी नहीं कर रहे हैं, अपितु एक तरह के परीक्षण के लिए, एक अनुभव के लिए, मैं यह देखना चाहती थी कि क्या मनुष्य अकेले ही अपने कर्मों की मंजिल तक पहुँच सकते हैं और क्या वे अपनी आंतरिक आध्यात्मिक शक्ति का सामना कर सकते हैं, क्या वे मारा के राजा के प्रभाव और निर्णय के बिना, सच्चे मन से, गहराई से ईश्वर को याद कर सकते हैं, यानी क्या वे कर्मों के परिणामों को अपने हाथों में ले सकते हैं। लेकिन मुझे इसमें कुछ खास सुधार होता हुआ भी नहीं दिख रहा है। लोग ईश्वर के आशीर्वाद और कृपा की सराहना करना धीरे-धीरे कम करते जा रहे हैं। और वे कल की चिंता किए बिना या तो बुराई के रास्ते पर या आराम के रास्ते पर चल पड़ते हैं।

आप खुद देख सकते हैं कि ये सारे युद्ध छिड़ रहे हैं और एक-दूसरे के खिलाफ हो रही ये सारी अनुचित लड़ाइयाँ दुनिया को और भी नीचे खींच रही हैं। और फिर इससे ग्रह की आबादी को नुकसान पहुंचता है- केवल मनुष्यों को ही नहीं, जानवर-जन और अन्य प्रजातियों की तो बात ही छोड़ दें। हम सचमुच अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। इसलिए, भले ही मुझे शांति की खबरें और अच्छी खबरें वगैरह बहुत पसंद हों, फिर भी मैं हमेशा खुलकर आपको बताने की हिम्मत नहीं करती, क्योंकि मुझे पता है कि कल आपको एक अलग कहानी, एक विपरीत कहानी सुनने को मिल सकती है। यह दुखद बात है, लेकिन हम केवल अपनी तरफ से पूरी कोशिश ही कर सकते हैं।

तो मैंने मारा के राजा से बात की और उन्होंने कहा, “हाँ। शांति सचमुच आ रही है।” मैंने कहा, "हाँ, लेकिन मुझे उतना नहीं दिख रही जितना मैं देखना चाहती हूं।" लेकिन खैर, मुझे बताओ, हम कैसे जीत सकते हैं? फिर हमें शांति कैसे मिल सकती है? तो उन्होंने कहा, “प्रेम के कारण।” प्रेम ने युद्ध जीते, और शांति के राज करने का मौका है।" तो मैंने मारा के राजा से कहा, “ठीक है। आप इस दुनिया में अपना न्याय करना जारी रख सकते हैं। आप अपनी शक्ति के अनुसार हर संभव प्रयास कर सकते हैं ताकि लोगों को यह पता चले कि उनके कर्मों के अनुसार परिणाम भुगतने पड़ते हैं।”

अच्छे कर्मों का फल अच्छा ही होता है। बुरे कर्मों के बुरे परिणाम होते हैं। और भले ही कभी-कभी लोग इसे तुरंत न देख पाएं, लेकिन यह जरूर आएगा। भौतिक अस्तित्व और नियमों की इस दुनिया में कोई भी बच नहीं सकता। बेशक, आप, मेरे ईश्वर के शिष्य, मुझे यह और वह बताएंगे कि आपका जीवन बेहतर है; आपके जीवन में चमत्कार हैं; आप सुरक्षित महसूस करते हैं। लेकिन आप ही वो खास लोग हैं जो कर्म के नियम का सम्मान करते हैं और उसी के अनुसार अपना जीवन जीते हैं! इसीलिए।

प्रिय मास्टर और सुप्रीम मास्टर टीवी टीम, मैं मास्टर को धन्यवाद देने के लिए लिख रही हूँ कि उन्होंने 2005 में दीक्षा प्राप्त करने के बाद से दो बार मेरी जान बचाई है। पहली बार ऐसा 2007 में हुआ था, और यह सचमुच अद्भुत था, क्योंकि मास्टर समय और स्थान को बदलने में सक्षम थे! मैं कार में आगे की सीट पर बैठी थी। चौराहे को पार करते समय, हमारी कार के चालक ने सड़क के दाहिनी ओर देखे बिना ही गाड़ी आगे बढ़ा दी। फिर मैंने देखा कि हमारी कार से कहीं बड़ी एक एसयूवी पहले ही हमारी ओर आ रही थी। यह हमसे सिर्फ कुछ मीटर दूर था, तेजी से आ रहा था, और इसके लिए समय पर रुकना असंभव था, क्योंकि हम इसके रास्ते में आ चुके थे, और यह ठीक उसी जगह टकराने वाली थी जहां मैं बैठी थी। मुझे बस अपनी आंखें कसकर बंद करने का ही समय मिला। मुझे पता था कि दुर्घटना अपरिहार्य है और मेरी मृत्यु होने वाली है। फिर मुझे अपने ऊपर प्रकाश की एक सुरंग खुलती हुई महसूस हुई, और मुझे पता चल गया कि मुझे मेरे शरीर से बाहर निकाल दिया जाएगा। उस क्षण, मेरे मन में केवल यही शब्द आए, जो मुझे हमेशा याद रहेंगे: "मास्टर, मैं आ रही हूँ!" और मैं प्रकाश की सुरंग से गुजरने के लिए आसन्न प्रभाव की प्रतीक्षा कर रही थी। हालांकि, कुछ सेकंड बीत गए और कोई दुर्घटना नहीं हुई। आश्चर्यचकित होकर मैंने अपनी आँखें खोलीं और देखा कि, एक बिल्कुल ही अस्पष्ट तरीके से, हम अभी भी सड़क पर उसी जगह पर थे, और वह कार जो कुछ सेकंड पहले हमसे टकराने वाली थी, अब बहुत पीछे छूट गई थी! यह आगे बढ़ने के बजाय पीछे की ओर चला गया था, जो कि बिल्कुल असंभव था! उस क्षण मुझे पता चला कि ईश्वर ने समय और स्थान को इस तरह बदला था ताकि हमें बिना किसी दुर्घटना के सड़क पार करने का अवसर मिल सके।

मास्टर ने दूसरी बार मेरी जान हाल ही में 29 अक्टूबर, 2024 को स्पेन के वालेंसिया में आई अचानक बाढ़ के दौरान बचाई थी। मास्टर की मदद से ही हम घर को पूरी तरह से जलमग्न होने से पहले छोड़ पाए - मेरे पति (वह भी दीक्षित हैं), हमारी छह बिल्लियाँ और मैं। उनके बाद से, मास्टर हमारी देखभाल कर रहे हैं, कई अच्छे लोगों के माध्यम से हमारी मदद कर रहे हैं। हे प्रिय मास्टर, आपके प्रति अपनी कृतज्ञता, अपनी प्रशंसा और अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। हमेशा हमारे साथ रहने, हमारी रक्षा करने और हमारा मार्गदर्शन करने के लिए आपका धन्यवाद। आप हमें बहुत प्यारे हैं। अत्यंत विनम्रता और असीम कृतज्ञता के साथ, आपकी शिष्या लाइया और मेरा परिवार, वालेंसिया, स्पेन से।

मैं मास्टर को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने मुझ जैसे नासमझ शिष्य को भी प्रेम, देखभाल और शिक्षा दी। पहले मैं मास्टर पर संदेह करता था, हठपूर्वक उसी बात पर विश्वास करता था जिसे मैं सही मानता था, और मास्टर की शिक्षाओं पर पूरी तरह से विश्वास नहीं करता था। हालांकि, जब मैं बहुत छोटा था तब से लेकर अब तक, मास्टर ने मुझे कई बार मृत्यु के मुंह से बचाया है।

तीन सबसे यादगार पलों में से एक वह था जब मुझे एक नशे में धुत ड्राइवर ने टक्कर मार दी थी। सबने कहा कि मुझे आसमान में फेंक दिया गया और फिर मैं नीचे गिर गया, लेकिन जब मुझे होश आया तो मैंने केवल एक सफेद पर्दा देखा और किसी कोमल चीज ने मुझे गले लगा लिया। जब मैं जागा तो मैंने देखा कि मेरी साइकिल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन मुझे बिल्कुल भी चोट नहीं आई थी।

दूसरी बार, एक व्यक्ति जो तेज गति (लगभग 80-90 किलोमीटर प्रति घंटा) से मोटरसाइकिल चला रहा था, उसने मुझे टक्कर मार दी, लेकिन मुझे केवल कुछ मामूली खरोंचें आईं और साइकिल को थोड़ा नुकसान हुआ।

तीसरी बार, मैं अपनी मोटरसाइकिल को तेज गति (90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा) से चला रहा था, और जब मैं मोड़ के पास पहुंचा, तो अचानक मेरा गले का स्कार्फ मेरे चेहरे पर आ गया और लगभग एक या दो मिनट के लिए मेरी आंखों को ढक लिया। जब मेरी दृष्टि वापस आई, तो मैंने देखा कि मैं उस स्थान पर था जहाँ मेरी आँखों पर स्कार्फ ढकने से "पहले" था और मोटरसाइकिल की गति अभी भी 90 किलोमीटर प्रति घंटा थी। मैंने तुरंत बाइक की गति कम कर दी और पवित्र नामों का जाप किया।

2019 से अब तक कोविड-19 के तीन प्रकोप हो चुके हैं। तब मुझे अहसास हुआ कि मास्टर का शिष्य होना मेरे लिए कितना सौभाग्य की बात है। बाहर चाहे कितनी भी अफरा-तफरी मची हो, मेरा परिवार पूरी तरह सुरक्षित था और कुछ भी नहीं हो रहा था।

जब तक हम मास्टर में विश्वास रखते हैं, वीगन हैं, पंच नियम का पालन करते हैं, उचित मात्रा में ध्यान करते हैं, मास्टर की शिक्षाओं और निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं, तब तक मास्टर हमारे साथ संसार के अंत तक रहेंगी, जैसे उनके गीत "मैं आपको सदा प्रेम करूंगी" में कहा गया है, चाहे मृत्यु से पहले हो या बाद में, पृथ्वी पर हो, स्वर्ग में हो या किसी अन्य लोक में। इसलिए, हम दीक्षा प्राप्त करने वालों को भविष्य से डरना नहीं चाहिए, बल्कि ध्यान करने का भरपूर प्रयास करना चाहिए, जो कुछ हमने ठीक से नहीं किया उनके लिए पश्चाताप करना चाहिए और हर दिन मास्टर के साथ मिलकर सर्वशक्तिमान ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए। मेरी कामना है कि भगवान और मानवता की जीत हो। औलक (वियतनाम) से हुय होआंग

इत्यादि…

और आप पूरी तरह से सुरक्षित हैं। लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि सर्वशक्तिमान ईश्वर मदद कर रहे हैं और फल दे रहे हैं। लेकिन यह हमेशा पूरी रकम का भुगतान नहीं कर सकता, खासकर बड़ी या बुरी रकम का। इसलिए आपको अभी भी ईश्वर के आदेशों, बुद्ध के पांच उपदेशों के अनुसार जीवन जीना होगा। और हमारे पास मारा के नियम भी हैं। मैं इन्हें बाद में आपको पढ़कर सुनाऊंगी।

Photo Caption: "दूसरों को ख़ुशी पहुँचाने से जुड़ी ख़ुशी भरी घटनाओं की एक श्रृंखला"

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