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यह आप ही हैं: 'असि हबलाबा क्वेट्ज़लकोटल (इस प्रकार क्वेट्ज़लकोटल बोले)’ से प्रवचन, 2 का भाग 1

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आज क्वेटज़ालकोटल (शाकाहारी) की चुनिंदा शिक्षाएँ प्रस्तुत करना हमारे लिए हर्ष का विषय है, जो हमें परमात्मा से कैसे एकाकार होना सिखाती हैं।

वह आप ही हैं

“प्रार्थना करने के लिए, तुम्हें बाहरी संसार की हर वस्तु छोड़कर, आँखें बंद करके, मुझे अपने भीतर देखना होगा। तब तुम सब एक हृदय बन जाओगे, जो मेरा हृदय होगा, और एक विचार बनोगे, जो मेरा विचार होगा। और मैं तुम्हारे भीतर आ जाऊँगा, और तुम मेरे भीतर आ जाओगे। जब भी तुम देने के लिए हाथ बढ़ाओगे, वह मेरा हाथ होगा।

और जब भी तुम प्रकाश के बारे में बोलने के लिए मुँह खोलोगे, तब मेरा मुख प्रकाश के बारे में बोल रहा होगा। जब जीवन के काँटों भरे मार्ग और दुखों के दहकते मोड़ों पर चलते-चलते तुम्हारे पाँव थक जाएँगे, तब दूसरा पाँव होगे जो तुम्हें शक्ति देंगे और दूसरे हाथ तुम्हें धोकर, स्वच्छ करके आगे बढ़ने के लिए तैयार करेंगे, क्योंकि मेरे हाथ, मेरे पाँव, और मेरा मुख संसार के ही हाथ, पाँव और मुख हैं, जो केवल प्रकाश फैलाना चाहते हैं।

अपने हृदय को निष्क्रिय मत होने दो; अपने सद्विचारों को मत दबाओ, क्योंकि प्रकाश तुम्हारे भीतर अपनी विजय के बीज बो रहा है, यदि प्रकाश ही अंधकार बन जाए, तो बताओ, संसार कैसे प्रकाशित होगा और मार्ग तुम्हारी ओर कैसे निर्देशित होगा? यदि कोई कहे काला, और दूसरा नीला कहे, और तीसरा कहे हरा, तो तुम्हें सभी को समझना चाहिए, और जानना चाहिए कि सत्य सभी को आश्रय देता और उनकी रक्षा करता है।

शब्दों के कारण संसार के अपने भाइयों से संबंध मत बिगाड़े; बल्कि, उनसे ऊपर उठे। अहिंसा को अपने भीतर स्थान देने के लिए दृढ़ बनो, क्योंकि वह शक्तिशाली नहीं, जो अपने भाई की अज्ञानता से मिले प्रहार से भी तीखा प्रहार लौटाता है; शक्तिशाली वह है, जो उसे क्षमाकर और समझकर उसके लिए प्रार्थना करता है कि वह सतर्कता से प्रकाश की ओर मुड़े।

यदि तुम सुदूर परलोक के बारे में कुछ जानते हो, तो उसका संदेश देते समय सावधान रहो; अपने आचरण से अपकीर्ति मत उत्पन्न करो, क्योंकि विकास-पथ पर चल रहे तुम्हारे कई छोटे भाईयों बच्चों जैसे हैं, वे तुम में जो देखते है वैसा ही करते हैं, और फिर वे कहेंगे: ‘यह कैसे कहता है कि इसे खज़ाना मिला है, जबकि इसका व्यवहार ऐसा है मानो इसे केवल पत्थर मिले हों? पहले स्वयं उस खज़ाने तक जाओ, और बाद में उसे बाँटो, ताकि तुम्हारे प्रेम के मोतीओं ही तुम्हारे उपदेश का सर्वोत्तम प्रमाण बनें।

इस संसार के विद्यालय में बहुत-से लोग सिखाने आए हैं। फिर भी मैं तुमसे कहता हूँ: सबसे सीखो, क्योंकि हर किसी के पास तुम्हें बताने के लिए कुछ है। लेकिन उस सीख से अपने भीतर रहे गुरु को सदैव समृद्ध करो और जागृत करो। और बाद में, जब तुम्हारा मस्तक एक सूर्य बन जाए, तब मार्गों पर जाकर अपने प्रत्येक भाईयों के भीतरी गुरु को पुकारो। उन अज्ञानियों जैसे मत बनो, जो एक धार्मिक पंथ को दूसरे से श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए लड़ते और हिंसा का सहारा लेते हैं। उन लोगों जैसे मत बनो जो स्वयं को दिव्य शब्द का संरक्षक बताते हैं, पर अपने कर्मों से उसे कलंकित करते हैं। फिर भी, उन्हें माफ कर दिया जाना चाहिए और उन्हें समझा जाना चाहिए, क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं।

ऊपर देखो और इस संसार के भ्रम तथा इसकी बाधाओं से दूर उड़ जाओ। परमपावन से एकाकार होने के तुम्हारे हर प्रयास के साथ नए पंख उगते रहेंगे। और हे भाइयो, जैसे मैं रात के सन्नाटे, अविश्वास की शीतलता, अव्यवस्था की बेचैनी और अज्ञानता के असामंजस्य में तुम्हारे पास आता हूँ, वैसे ही तुम भी मेरे पास आओ। यह मार्ग कितना कठिन है! लेकिन धन्य है वह कठिनाई, जो मार्ग को विस्तृत कर हमें परमपावन से एकाकार करती है। और जब कोई भाई आकर तुमसे पूछे, ‘मेरे भाई, बताओ, तुम स्वर्ग से कैसे बात कर पाते हो? क्या मैं भी स्वर्ग से बात कर सकता हूँ?’ तो उससे कहना, ‘जब भी तुम अपने संपूर्ण अस्तित्व से कोई अच्छा कर्म करके पृथ्वी पर उसकी छाप छोड़ते हो, तब तुम उस पर एक प्रार्थना लिखते हो, जिसे स्वर्ग सुनता है; फिर भी यदि तुम शब्दों का उपयोग करना चाहते हो, तो इस प्रकार कह सकते हो: हे परमपावन, जो हमारे भीतर आशा हैं, जैसे हम आपमें प्रकाश हैं। हमारे द्वारा धन्य हों, क्योंकि हम आपका नाम हैं।’”
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