विवरण
डाउनलोड Docx
और पढो
भौतिक प्रगति की गति बढ़ती जाती है, जबकि मानवता का नैतिक बल घटता जाता है। जब मनुष्य विवेक पर आधारित नैतिक आदर्शों को त्याग देते हैं, तो सभ्यता का क्या होता है? लोग स्वयं को तर्कसंगत और निष्पक्ष मानते हैं, लेकिन अनजाने में उनके निर्णयों पर विचारों और भावनाओं का प्रभाव पड़ता है। विवेक पर आधारित नैतिक आदर्शों को पुनः स्थापित करके ही हम अपने परिवेश के अनुसार ढलने के बजाय अपना भविष्य स्वयं गढ़ सकते हैं।











