खोज
हिन्दी
  • English
  • 正體中文
  • 简体中文
  • Deutsch
  • Español
  • Français
  • Magyar
  • 日本語
  • 한국어
  • Монгол хэл
  • Âu Lạc
  • български
  • Bahasa Melayu
  • فارسی
  • Português
  • Română
  • Bahasa Indonesia
  • ไทย
  • العربية
  • Čeština
  • ਪੰਜਾਬੀ
  • Русский
  • తెలుగు లిపి
  • हिन्दी
  • Polski
  • Italiano
  • Wikang Tagalog
  • Українська Мова
  • अन्य
  • English
  • 正體中文
  • 简体中文
  • Deutsch
  • Español
  • Français
  • Magyar
  • 日本語
  • 한국어
  • Монгол хэл
  • Âu Lạc
  • български
  • Bahasa Melayu
  • فارسی
  • Português
  • Română
  • Bahasa Indonesia
  • ไทย
  • العربية
  • Čeština
  • ਪੰਜਾਬੀ
  • Русский
  • తెలుగు లిపి
  • हिन्दी
  • Polski
  • Italiano
  • Wikang Tagalog
  • Українська Мова
  • अन्य
शीर्षक
प्रतिलिपि
आगे

आरोही मास्टरों का प्रकाश: आरोही मास्टर संत जर्मेन (शाकाहारी) द्वारा अनवील्ड मिस्ट्रीज़ से 2 का भाग 1

विवरण
डाउनलोड Docx
और पढो
आज, गॉडफ्रे रे किंग की पुस्तक "अनवेल्ड मिस्ट्रीज़" से कुछ अंश प्रस्तुत करना एक खुशी की बात है, जिसमें सेंट जर्मेन (शाकाहारी) श्री बैलार्ड को सिद्ध मास्टर के दिव्य प्रेम के प्रकाशमान मूलतत्त्व के बारे में विस्तार से बताते हैं।

अध्याय 5 इंका स्मृतियाँ

"सिद्ध मास्टर वह व्यक्ति है जिसने स्व-जागरूक प्रयास से अपने भीतर इतना प्रेम और शक्ति उत्पन्न कीये हैं कि वह सभी मानवीय सीमाओं के बंधनों को तोड़ सके, और इसलिए वह स्वतंत्र है और मानवीय अनुभव से परे शक्तियों के उपयोग के लिए भरोसे के लायक है।" वह स्वयं को सर्वव्यापी ईश्वर 'जीवन' के साथ 'एक' महसूस करता है। इसलिए, सभी शक्तियां और वस्तुएं उनके आदेश का पालन करती हैं क्योंकि वह स्वतंत्र इच्छाशक्ति वाला एक आत्म-जागरूक प्राणी है जो अपने भीतर के 'प्रकाश' के हेरफेर द्वारा सभी को नियंत्रित करता है।

यह इसी 'प्रकाश' के विकिरण या प्रवाह के माध्यम से होता है, जो वास्तव में उनका अपना 'दिव्य प्रेम का प्रकाशमान मूलतत्त्व' है, जिसके द्वारा एक सिद्ध मास्टर उन लोगों की सहायता करने में सक्षम होते हैं जो उनकी देखरेख और मार्गदर्शन में आते हैं।

जब किसी शिष्य पर इस प्रकार का बहाव बरसता है, तो उनके अपने आंतरिक शरीरो, और मेरा तात्पर्य उनके भावनात्मक, मानसिक और कारणिक शरीरों से है, मास्टर के प्रकाशमान सार को अवशोषित कर लेते हैं, और उनके भीतर का 'प्रकाश' एक चिंगारी की तरह चमकता और फैलता है जिसे हवा देकर ज्वाला में परिवर्तित किया जा सकता है।

इस 'प्रकाशमान मूलतत्त्व' में ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति समाहित है, क्योंकि यह सभी कलह को दूर करता है और सभी अभिव्यक्तियों में पूर्ण संतुलन स्थापित करता है। सिद्ध मास्टर का शरीर पृथ्वी की असामंजस्यता पर निरंतर अपने 'प्रकाश सार' की किरणें प्रवाहित कर रहा है, उन्हें उसी प्रकार विलीन कर रहा है जैसे हमारे भौतिक सूर्य से निकलने वाली प्रकाश और ऊष्मा नामक बल की किरणें कोहरा को विलीन कर देती हैं।

वे पृथ्वी पर मानवता के लिए जो विकिरण उत्सर्जित करते हैं, वह सचेत रूप से आकर्षित ऊर्जा होती है जिसे वे गुणवत्ता प्रदान करते हैं और फिर एक निश्चित परिणाम प्राप्त करने के लिए उन्हें पुनः प्रसारित करते हैं। इस प्रकार, वे उन व्यक्तियों, स्थानों, परिस्थितियों और वस्तुओं को हजारों-हजारों बार सुरक्षा प्रदान करते हैं जिनके बारे में मानव जाति पूरी तरह से अनजान होती है, अपने रक्षकों और उपकारकों से बेखबर, शांतिपूर्वक अपने नियत मार्ग पर चलती रहती है।

इस प्रकार की गतिविधि में, सिद्ध मास्टरों उन शरीरों को बदलने में सक्षम होते हैं जिनमें वे कार्य करते हैं, जैसे कोई व्यक्ति सामान्यतः अपने कपड़े बदलता है, क्योंकि कोशिकीय संरचना हमेशा सचेत नियंत्रण में होती है, और प्रत्येक परमाणु उनके सूक्ष्मतम निर्देश का पालन करता है। यदि उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य के लिए आवश्यकता हो, तो वे एक या अधिक देहों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं, क्योंकि परमाणुओ का बना देह को संघटित करने या विलीन करने की उनकी क्षमता बिल्कुल असीमित है। वे प्रकृति की शक्तियों के लिए सभी पदार्थों और ऊर्जा के सर्वशक्तिमान प्रकटकर्ताओ हैं, जिसका अर्थ है कि चारों तत्व उनके इच्छुक और आज्ञाकारी सेवक हैं।

ये गौरवशाली प्राणीओ, जो विकसित हो रही मानव जाति की रक्षा और सहायता करते हैं, वे प्रेम, प्रकाश और पूर्णता के सिद्ध मास्टर कहलाते हैं। वे 'मास्टर' शब्द के सभी अर्थों को साकार करते हैं क्योंकि भीतर विद्यमान ईश्वर के प्रेम, परमज्ञान और शक्ति को प्रकट करके वे मानव से संबंधित सभी चीजों पर अपनी महारत को प्रदर्शित करते हैं। अतः, वे मनुष्य से परे अगली अभिव्यक्ति में 'उत्थान' हो चुके हैं, जो कि परममानवीय दिव्यता, शुद्ध और शाश्वत, सर्वशक्तिमान 'पूर्णता' है।

पृथ्वी पर रहने वाली मानवता अक्सर अपनी अज्ञानता और सीमाओं के कारण यीशु और सिद्ध समूह के कई अन्य सदस्यों के बारे में निर्णय सुनाने और विभिन्न राय व्यक्त करने का साहस करती है। यह प्रथा उन सबसे बाध्यकारी चीजों में से एक है जिनमें यह लिप्त हो सकता है, क्योंकि इस तरह की गतिविधि में इस तरह से भेजी गई आलोचना और निर्णय सीधे अपने जनक के पास लौट आते हैं और इस प्रकार मानव जाति अपने द्वारा निर्मित दुख और सीमाओं से और भी अधिक मजबूती से बंध जाती है। इस नियम की क्रिया यह है कि सिद्ध मास्टरो, मानवीय सीमाओं से स्वयं को मुक्त करके, प्रकाश के एक प्रज्वलित प्रवाह हो गए हैं जिसमें किसी भी प्रकार का मानवीय असामंजस्यपूर्ण विचार शायद ही प्रवेश कर सकता है। यह सभी विनाशकारी विचारों, सृजन और भावनाओं को उनके प्रेषक के पास वापस लौटने के लिए विवश करता है और उन्हें उनकी अपनी ही रचना की जंजीरों में और भी अधिक कसकर बांध देता है।

यदि मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं और शब्दों को वायुमंडल में जाते हुए, ईथर पर एकत्रित होते हुए और अपने जैसे और भी विचारों को वापस आते हुए देख पाते, तो वे न केवल अपने द्वारा उत्पन्न की गई चीजों को देखकर चकित होते, बल्कि मुक्ति के लिए चीखते और कम से कम ऐसी रचना को मन से मिटाने के लिए, वे पूर्ण दृढ़ संकल्प के साथ अपने भीतर के दैवीय स्वरूप का सामना करते और उसमें प्रवेश कर जाते। विचार और भावनाएँ सजीव, स्पंदित वस्तुएँ हैं। जो व्यक्ति यह जानता है, वह अपने परमज्ञान का प्रयोग करेगा और उसी के अनुसार स्वयं को नियंत्रित करेगा।

इस पृथ्वी पर अनुभव प्राप्त कर रही मानवजाति के लिए यीशु वही हैं जो प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान महान ईश्वर आत्म, उनके व्यक्तिगत या बाहरी स्व के लिए है। उन्होंने परम अभिलेख को बाह्य जगत के समक्ष प्रकट किया, और वे आज भी व्यक्ति की सभी सीमाओं से स्वयं को मुक्त करने और दिव्यता को उस रूप में व्यक्त करने की क्षमता का जीता प्रमाण हैं जैसा कि मूल रूप से उस पहली स्थिति के लिए अभिप्रेत था जिसमें मानवता का अस्तित्व पूर्णतः सामंजस्यपूर्ण और स्वतंत्र था।

जब वे लोग जो पृथ्वी के आम बच्चों की तुलना में जीवन और ब्रह्मांड के नियमों का अधिक गहराई से अध्ययन करते हैं, इस तथ्य से अवगत हो जाते हैं कि सिद्ध मास्टर मौजूद हैं, तो वे अक्सर इन महान आत्माओं से अनुदेश प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। हालांकि, कई मामलों में, यह भीतर की आत्मा का महान प्रकाश के प्रति एक अवचेतन उपदेश है, फिर भी व्यक्तिगत स्व को इस बात का बहुत कम एहसास होता है कि वह उन महान प्राणियों के साथ किस संबंध में खड़ा है जो पूरी तरह से दिव्य हैं।

एक ऐसा तरीका है जिससे कोइ अत्यंत गंभीर और दृढ़ निश्चयी छात्र उनमें से किसी एक से संपर्क कर सकता है, लेकिन यह केवल पर्याप्त प्रेम और व्यक्तित्व के अनुशासन की सक्रियता के माध्यम से ही संभव है। यदि इस तरह के संपर्क का उद्देश्य केवल जिज्ञासा को शांत करना हो, महज किसी समस्या का समाधान करने सिद्ध मास्टर के अस्तित्व को साबित करना या खंडन करना हो, या व्यक्तित्व में किसी संदेह को राजी करना हो, तो यह कभी संभव नहीं होगा, इस बात का पूरा भरोसा रखें, क्योंकि आरोही मेजबान कभी भी किसी भी शिष्य के मानवीय पहलू को संतुष्ट करने में रुचि नहीं रखते। उनका संपूर्ण प्रयास भीतर विद्यमान ईश्वरीय स्वरूप के विस्तार पर केंद्रित है ताकि उनकी शक्ति इतनी बलपूर्वक मुक्त हो सके कि वह मानव स्व में मौजूद उन सीमाओं को तोड़ सके जो उन्हें मानसिक, भावनात्मक और भौतिक जगत में अभिव्यक्ति के लिए एक परिपूर्ण माध्यम प्रदान नहीं करती हैं। विचार, भावना और क्रिया के क्षेत्र ये हैं।
और देखें
नवीनतम वीडियो
उल्लेखनीय समाचार
2026-07-18
369 दृष्टिकोण
उल्लेखनीय समाचार
2026-07-18
572 दृष्टिकोण
सौंदर्यवादी क्षेत्रों के बीच एक यात्रा
2026-07-18
299 दृष्टिकोण
मास्टर और शिष्यों के बीच
2026-07-18
558 दृष्टिकोण
उल्लेखनीय समाचार
2026-07-17
867 दृष्टिकोण
33:16
उल्लेखनीय समाचार
2026-07-17
1 दृष्टिकोण
सौंदर्यवादी क्षेत्रों के बीच एक यात्रा
2026-07-17
522 दृष्टिकोण
मास्टर और शिष्यों के बीच
2026-07-17
917 दृष्टिकोण
साँझा करें
साँझा करें
एम्बेड
इस समय शुरू करें
डाउनलोड
मोबाइल
मोबाइल
आईफ़ोन
एंड्रॉयड
मोबाइल ब्राउज़र में देखें
GO
GO
ऐप
QR कोड स्कैन करें, या डाउनलोड करने के लिए सही फोन सिस्टम चुनें
आईफ़ोन
एंड्रॉयड
Prompt
OK
डाउनलोड